सफ़र के रास्ते जितने कठिन होंगे, मंज़िल उतनी शानदार होगी। हाँ! रुकना मत, चलते रहो, चलते रहो मुसलसल। Twitter @kkpbanaras
बुधवार, 28 अप्रैल 2021
भीड़
बुधवार, 21 अप्रैल 2021
रिश्तों से दूर होकर ज़िन्दा हूँ, सो मुजरिम हूँ।
रविवार, 11 अप्रैल 2021
बात मन की
बुधवार, 24 मार्च 2021
अधूरा चाँद
गुरुवार, 11 मार्च 2021
महाशिवरात्रि
गुरुवार, 4 मार्च 2021
परोसना आसान नहीं होता।
शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2021
वीर सावरकर
गुरुवार, 25 फ़रवरी 2021
बनारस love
रविवार, 21 फ़रवरी 2021
खूबसूरत
चले जो आंधी वो तिनका तिनका
बिखरे आसिया, गम नही हैं।
जो तोड़ दे मेरे हौसलो को
अभी वो तूफाँ उठा नहीं है।
शनिवार, 20 फ़रवरी 2021
#kkpbanaras
बुधवार, 17 फ़रवरी 2021
मंगलवार, 16 फ़रवरी 2021
सोमवार, 15 फ़रवरी 2021
सोमवार, 28 दिसंबर 2020
बनारस से इश्क़।
शुक्रवार, 25 दिसंबर 2020
यादों के पन्ने
सोमवार, 16 नवंबर 2020
छठ महापर्व
हम ज़िन्दगी के किरायेदार हैं और फिलहाल बनारस ही ओढ़ना-बिछौना है हमारा। इसी ज़िन्दगी को बड़े ही आकांक्षाओं के साथ 10/10 के कमरे में घर्षित कर रहै हैं। ज़रूरी भी है क्योंकि कहते हैं कुछ पाने के लिए कुछ तो खोना पडबे करता है। अब देख ही लीजिए आदमी अपना जन्मदिन भूल सकता है लेकिन 2020 जीते जी तो नहिए भूल पाएगा। ई जो साल चल रहा है ई होली के रंग से लेकर दशहरा और दीवाली के रंग तो फीका कर ही गया। सारे तीज-त्योहार घर-परिवार से 400 किलोमीटर दूर सिमट गया। लेकिन अब कैसे रहा जा सकता है, मन को कैसे मनाया जा सकता है? ई बार कोई बहाना से खुद को फुसला नहीं पाएँगे। बात ई है न कि अब जो आ रहा है ऊ केवल पर्व और परम्परा नहीं हमारा इमोशन है। आप समझ गए होंगे कि हम छठ की बात कर रहे हैं। बड़ी मशक्कत से हम घर पहुँच ही गए हैं, बात ई है न कि ई जो छठ महापर्व है न ई हमलोग को वर्षों से घर-परिवार और साक्षात दृश्य देव एवं प्रकृति से जोड़े हुए रखता है। अब जो घर पहुँच ही गए हैं तब शान्ति प्रेम और सम्पूर्ण रूप से स्वच्छता के प्रतीक रूपी इस महापर्व में ही होली, दशहरा और दीवाली के रंग को ज़रूर मन में भर लेंगे और प्रेम और सौहार्द से सबको रंगीन कर देंगे। मन को इतना हरा-भरा कर देंगे कि उसका सारा कसर पूरा हो जाए, आखिर साल भर फुसलाये रखे थे उसको। एगो बात बताना भूल गए थे कि अब जोर-शोर से छठ की तैयारी शुरू हो चुकी है। भईया तनिको आराम नहीं मिलता है ई पर्व में लेकिन ऊर्जा भी भरपूर मिलता है इसमें। अब आप ही देख लीजिए कि दादी 3 दिन निर्जला व्रत रखती है फिर भी दिन भर लगले रहती है। कहते हैं न समस्त ऊर्जा के देव स्वयं भगवान भाष्कर ही तो हैं। आपसे आग्रह है कि खुद को भी सुरक्षित रखें और अपने अनमोल चहेता जन को भी सुरक्षित रखें।
#kkpbanaras
डिअर दिसंबर
ये दिसंबर तो अब तलक रुका है तुमने ही साथ छोड़ दिया! शायद प्रेम का ताल सूख गया होगा पर वक़्त से पहले कैसे? हो सकता है अश्रुओं के ताल मौसमी रिवा...
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बचपन की साइंस और बाद को जियोग्राफी न पढ़ा होता तो बेशक़ आज कहता कि पृथ्वी सूर्य के चारों ओर नहीं घूम रही है। दरअसल काले अक्षरों से परे भी एक द...
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हर शख़्स में होती है अनेकों अच्छाइयाँ और थोड़ी सी बुराइयाँ। बुराईयाँ उसमें नहीं होती बल्कि उसके करतब हमें या समाज को पसन्द नहीं आते। अगर उसे ल...
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जल्दबाजी, हड़बड़ी हमें हमसे अलग करने में कोई कसर नहीं छोड़ता। मुझे मिला शहर से लगभग सबकुछ। डिग्री, दोस्त, और एक नई ज़िन्दगी। मेरे अन्दर बनारस शह...