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शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2021

वीर सावरकर

काल स्वयं मुझ से डरा है, 
मैं काल से नहीं, 

मैं बार-बार लौट आया हूँ, 
और फिर भी मैं जीवित हूँ। 
हारी मृत्यु है, मैं नहीं।
- वीर सावरकर

डिअर दिसंबर

ये दिसंबर तो अब तलक रुका है तुमने ही साथ छोड़ दिया! शायद प्रेम का ताल सूख गया होगा पर वक़्त से पहले कैसे? हो सकता है अश्रुओं के ताल मौसमी रिवा...