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गुरुवार, 11 मार्च 2021

महाशिवरात्रि

इस धरा में सब गोल है, गोल होना शून्य को भी इंगित करती है। पूरे विश्व के नाथ स्वयं शून्य के स्वामी हैं और हम अपने आप को उसी शून्य से दूर रखने की कोशिश में आदरणीय समझते हैं।
दरअसल शून्य की ओर जाना ही चरम आनन्द का मार्ग है। शिव हम में समाएँ और हम भी शून्य हो जाएँ। महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ।
#kkpbanaras, kkpbanaras

डिअर दिसंबर

ये दिसंबर तो अब तलक रुका है तुमने ही साथ छोड़ दिया! शायद प्रेम का ताल सूख गया होगा पर वक़्त से पहले कैसे? हो सकता है अश्रुओं के ताल मौसमी रिवा...